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प्रत्येक रोगी अलग होता है, और चिकित्सक और रोगी को एक-दूसरे की अपेक्षाओं को समझने, जोखिमों और लाभों को तौलने और आपसी निर्णय पर पहुंचने की आवश्यकता होती है।

स्टूल गुआएक टेस्ट : इसमें मल के नमूने का विश्लेषण किया जाता है रक्त के किसी भी निशान का पता लगाने के लिए मल के नमूने का विश्लेषण किया जाता है।

बवासीर के दौरान कौन-कौन से खाद्य पदार्थ खाने से बचना चाहिए?

कुछ शोध शौचालय पर बिताए गए समय और रक्तस्रावी बीमारी के बीच सीधा संबंध बताते हैं, हालांकि सेल फोन के उपयोग के साथ सटीक कारण और प्रभाव संबंध निर्धारित नहीं किया गया है।

बैठने या चलने में अधिक परेशानी नहीं होती।

इसबगोल, त्रिफला जैसी प्राकृतिक चीज़ें कब्ज़ से राहत देने में मददगार हैं।

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अगर आपको मल त्याग के दौरान खून आता है, तो किसी डॉक्टर से परामर्श website जरूर लें।

जब मलद्वार की नसों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, तो वे सूज जाती हैं और बवासीर बनती है।

अब आपको आयुर्वेद से जुड़ी सही जानकारी जानने के लिए इधर-उधर भटकने की ज़रूरत नहीं है। आप ‘अर्थ’ पोर्टल के ज़रिये एक ही जगह पर आयुर्वेद के सिद्धांत, उपचार और घरेलू इलाजों आदि के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल कर सकते हैं। “अर्थ” पोर्टल पर लिखित सारी जानकारी पतंजलि के आयुर्वेदिक विशेषज्ञों द्वारा प्रमाणित है साथ ही आप यहां बीमारियों से जुड़ी आयुर्वेदिक दवाइयों की सूची भी पा सकते हैं।

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में सर्जरी ही इसका एकमात्र समाधान है, और सर्जरी के बाद भी यह रोग दोबारा हो जाता है। इसलिए घरेलू उपचार और बेहतर जीवनशैली अपनाना चाहिए। इससे बवासीर के दोबारा होने की संभावना बहुत कम हो जाती है।

पवनमुक्तासन और भुजंगासन जैसे योगासन गुदा क्षेत्र में रक्त प्रवाह को बढ़ाते हैं।

मल त्यागने के बाद मस्से अपने से ही अन्दर चले जाते हैं। गंभीर अवस्था में यह हाथ से दबाने पर भी अन्दर नहीं जाते। इस तरह के बवासीर का तुरंत उपचार कराएं। 

शौच के वक्त जलन के साथ लाल चमकदार खून का आना।

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